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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 208 में से

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पृष्ठ 171

त्रिशतिका 143
नापियाँ उल्लिखित संख्याओं का
¼ सेंटीमीटर हैं।
त्रिशतिकाकार ने अपूर्ण शंकु की ऊँचाई 12 हाथ बताई है। उपरिलिखित
चित्र के अनुसार इसे पूर्ण शंकु का रूप देने पर इसकी ऊँचाई अवश्य ही 16
होगी। यह समरूप त्रिभुज के इस समीकरण से भी प्रकट है-
△ OAB तथा △ OCD समरूप हैं। अतः-
OA / OC = AB / CD → (x + 12) / x = 8/2 या 4
⇒ 4x = x + 12
⇒ 4x - x = 12
⇒ 3x = 12
⇒ x = 12/3 = 4
इस प्रकार CO की ऊँचाई 4 हाथ है। उल्लिखितानुसार AC की ऊँचाई 12
है। अतः कुल ऊँचाई 16 हाथ है। इसमें शंकु के समकक्ष सूत्र को समन्वित करते
हुए तथा उसमें से OC से बनने वाले आकार को घटाते हुए-
⅓ × 3162/1000 (r₁² h₁ - r₂² h₂) → ⅓ × 3162/1000 (8² × 16 - 2² × 4)
⇒ 3162/3000 × (11024 - 16)
⇒ 1.054 × 1008 = 1062.432
अथवा 1062 54/125
इस प्रकार हमने आधुनिक रीति से पूर्णांक में वही परिणाम प्राप्त कर लिया
है, जिसका त्रिशतिकाकार ने उल्लेख किया है।
इसकी व्याख्या में कहा है कि त्रिभुज तथा वृत्त के क्षेत्रफल भी इसी उपाय
से प्राप्त करना चाहिये। अतः इस श्लोक से संकेतित सूत्र ऊपर लिख दिये गए हैं।