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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 168, कुल 208 में से

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पृष्ठ 168

140 त्रिशतिका
घनाभ का आयतन ⇒ 12 × 3 × 8 = 288
त्रिभुजाकार गड्ढे का आयतन ⇒ 6 × 2 × 8 = 96
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सम्पूर्ण हौज का आयतन 384
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अन्यदुदाहरणम्
समविस्तारकरा दशपादयुता गणक यस्य खातस्य।
दैर्घ्ये षोडश सार्धा वेधोऽष्टौ तत्र किं गणितम्।। 89।।
न्यासः ⁴¹⁄₄ ³³⁄₂ ⁸⁄₁ गणितहस्ताः 1353
सुक्षेमा अनुवाद-हे गणितज्ञ, जिस खात के हाथ समान विस्तार वाले हैं,
उसकी चौड़ाई ¼ सहित 10 अर्थात् ⁴¹⁄₄ तथा लम्बाई ½ सहित 16 अर्थात् ³³⁄₂ है तथा
वेध या गहराई 8 हाथ है। उसका कितना ‘गणित’ या आयतन होगा।
अनुशीलन-यह समखात का उदाहरण है। इसमें घनाभ के सामान्य सूत्र के
अनुसार-
⁴¹⁄₄ × ³³⁄₂ × ⁸⁄₁ = 10824/8 = 1353 हाथ³
अन्यदुदाहरणम्
समचतुरस्रे खाते षोडश हस्ता भुजा सखे यत्र।
वेधोऽपि षोडशैव प्रकथ्यतां तत्र किं गणितम्।।
न्यासः 16। 16। 16।। लब्धं 4096।।
सुक्षेमा अनुवाद-सम चतुर्भुज खात में जिसकी लम्बी तथा चौड़ी भुजा
16-16 हाथ की है जिसकी गहराई भी 16 है। हे मित्र, उसका आयतन क्या होगा,
बताओ।
अनुशीलन-यह घन के आयतन का उदाहरण है। यहाँ 53 वें श्लोक के
नियमानुसार-
हौज का आयतन ⇒ 16³ अथवा 16 × 16 × 16 = 4096 घन हस्त
कूपस्य फले सूत्रम्
मुखतलतद्योगोनां वर्गैक्यकृतेः पदं दशगुणायाः।
वेधगुणं चतुरन्वितविंशतिभक्तं फलं कूपे।। 54।।