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त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 208 में से

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पृष्ठ 166

138 त्रिशतिका
पात्र जिसकी तीनों भुजाएँ समान हों, उसमें इस संक्रिया से गणित या उसका
आयतन ज्ञात होता है। । 53 ।।
अनुशीलन-इन श्लोकों में घन तथा घनाभ के आयतन को ज्ञात करने की
विधि बताई गई है। 53 वें श्लोक के अनुसार जिस पिण्ड की लम्बाई, चौड़ाई तथा
ऊँचाई वाली तीनों भुजाएँ परस्पर समान परिमाण की हों वह घन होता है। इन तीनों
का गुणनफल ही घनफल अथवा आयतन है। इन तीनों की भुजा समान होने से
किसी भी भुजा का घन उसका आयतन होगा। अतः-
घन का आयतन = कोई भी भुजा³
52 वें श्लोक के अनुसार घनाभ अर्थात् जिसकी तीनों विमाएँ ⇒ लम्बाई,
चौड़ाई तथा ऊँचाई समान न हों, उनके आयतन को ज्ञात करने के लिये उन तीनों
का गुणन करना चाहिये। अतः-
घनाभ का आयतन = लम्बाई × चौड़ाई × गहराई
इस श्लोक में यह भी कहा है कि जिस पिण्ड की लम्बाई या चौड़ाई या
गहराई की सम्पाती भुजाएँ परस्पर समानान्तर न हों, उसे असमखात कहते हैं।
इनका औसत निकाल कर पहले सम खात बना लेना चाहिये। उसके पश्चात् उक्त
सूत्र का प्रयोग करके उस घनाभ का आयतन ज्ञात करना चाहिये।
उदाहरणम्
द्वित्रिचतुष्करवेधा पुष्करिणी पञ्च हस्तविस्तारा।
षोडशहस्तायामा खातफलं कथ्यतामाशु।। 87।।
न्यासः 2। 3। 4।। 5।। 16।। लब्धं विषमफलम् 240
सुक्षेमा अनुवाद-कोई पुष्करिणी या बावली कहीं पर 2 कहीं 3 तथा कहीं
4 हाथ वेध या गहरी है। यह 5 हाथ विस्तार या चौड़ाई वाली तथा 16 हाथ आयाम
या लम्बाई वाली है। इसके खातफल या घन फल को शीघ्र बताओ।
अनुशीलन-यहाँ इसकी गहराई समान नहीं है। अतः 52 वें श्लोक के
अनुसार इसका औसत निकालते हैं। इसका नियम है कि सभी संख्याओं को जोड़
दें। पुनः उसे उन संख्याओं के जितने नम्बर हैं, उनसे भाग दे दें। पश्चात् प्रत्येक
को आपस में गुणित करें। अतः-
((2 + 3 + 4) / 3) × 5 × 16 = 3 × 5 × 16 = 240