त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें136 त्रिशतिका
उदाहरणार्थ-
a ⇒ 7 × 5 = 35, b ⇒ (49 - 25) / 2 = 12
c ⇒ (49 + 25) / 2 = 37
अथवा
a ⇒ 9 × 3 = 27, b ⇒ (81 - 9) / 2 = 36
c ⇒ (81 + 9) / 2 = 45
‘उपरिलिखित त्रिक में भी यह नियम लागू है-
a ⇒ 5 × 1 = 5 b ⇒ (25 - 1) / 2 = 12
c ⇒ (25 + 1) / 2 = 13
इस बढ़िया नियम के अनुसार किसी भी विषम संख्या के a होने पर त्रिक
प्राप्त किये जा सकते हैं।
श्लोक ५१ की व्याख्या के आधार पर भुज का सूत्र इस प्रकार है-
कोटिवर्गोनायाः कर्णकृतेर्मूलं भुजः।
अर्थ पूर्वोक्त है। यह कर्ण पर समीकरण से प्राप्त है-
√(लम्ब² + आधार²) = कर्ण
⇒ √(कर्ण² - लम्ब²) = आधार या भुज
कोटि या लम्ब का सूत्र इस प्रकार है-
भुजवर्गोनायाः कर्णकृतेर्मूलं कोटिः।
यह भी कर्ण पर समीकरण अनुसार प्राप्त है। इस प्रकार-
√(कर्ण² - आधार²) = लम्ब
पूर्वोक्त समकोण त्रिभुज के उदाहरणों में-
√(13² - 5²) = √(169 - 25) = √(144) = 12 लम्ब
इसी प्रकार-
√(15² - 9²) = √(225 - 81) = √(144) = 12 लम्ब