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त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 208 में से

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पृष्ठ 156

128 त्रिशतिका
यह π √10 मानने पर आधुनिक गणित के सर्वथा अनुरूप है-
√10 / 3 × त्रिज्या (व्यास + त्रिज्या) / 2 ⇒ √10×3 त्रिज्या² / (3 · 2) ⇒ √10 × त्रिज्या² / 2
यहां व्यास जीवा के समकक्ष है। क्योंकि व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा
होती है। साथ ही इस पर खींची गई त्रिज्या शर भी है। अतः अर्धवृत्त के क्षेत्रफल
के सूत्र के सन्दर्भ में क्रमशः जीवा और शर को रखने पर भी ठीक वही परिणाम
प्राप्त होता है।
श्रीधर ने प्रस्तुत सूत्र में परम्परा के अनुसार इस सूत्र का सामान्यीकरण
करते हुए प्रत्येक वृत्त-खण्ड के जीवा तथा शर के लिये यही सूत्र विकसित किया
है। यद्यपि अर्धवृत्त में व्यास तथा त्रिज्या तथा इस प्रकार जीवा और शर का जो
1 : ½ का अनुपात है, वह अन्य वृत्तखण्डों में लागू नहीं है। अतः अर्धवृत्त के सूत्र
को अन्य वृत्तखण्डों के लिये सामान्यीकृत करने पर सर्वथा सही परिणाम प्राप्त नहीं
हो सकता। श्रीधर आर्यभट के सूत्र¹ पर समीकरण द्वारा अन्य वृत्त-खण्डों में जीवा
तथा शर के सही अनुपात को भली भाँति जानते थे। अतः उन्होंने प्रस्तुत उदाहरण
में १३ जीवा के साथ ३ शर का बिल्कुल सही प्रमाण बताया है। फिर भी
परम्परानुसार अर्धवृत्त के इस सूत्र को सभी वृत्त-खण्डों के साथ सामान्यीकृत करने
पर जीवा और शर के अनुपात के अन्तर की भरपाई के लिये अर्धवृत्त के क्षेत्रफल
का बड़ा सूत्र मानते हुए वृत्त-खण्ड के सूत्र को विकसित किया है। इससे महावीर
आदि अन्य आचार्यों से अधिक सही मान प्राप्त हो सका है। पर सर्वथा सही नहीं।
आधुनिक गणित में वृत्त-खण्ड का सर्वथा सही क्षेत्रफल प्राप्त करने के
लिये पहले त्रिज्या-खण्ड का क्षेत्रफल प्राप्त करते हैं। पश्चात् इस खण्ड में निर्मित
त्रिभुज के क्षेत्रफल को घटाकर वृत्त-खण्ड का क्षेत्रफल प्राप्त करते हैं। प्रस्तुत
उदाहरण को इस विधि से हल करने के लिये पहले सही नापियों के साथ इस
प्रकार चित्रित करते हैं-
AB ⇒ जीवा = 13
x n ⇒ शर = 3
ब्रह्मगुप्त के सूत्र द्वारा प्राप्त-
x p ⇒ व्यास = 17
A O तथा B O त्रिज्या या त्रिभुज का कर्ण = 8.5
n o ⇒ त्रिभुज का लम्ब = 5.5
१. वृत्ते शरसंवर्गोऽर्धज्यावर्गः स खलु धनुषोः। —आर्यभटीय, गणितपाद श्लोक १७।