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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 208 में से

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पृष्ठ 151

त्रिशतिका 123
संख्याओं के अनुरूप चित्र इस प्रकार है-
[चित्र: समलम्ब चतुर्भुज युग्म: ऊपर 5 b₁, शीर्षलम्ब 8, मध्य भुजा 3, शीर्षलम्ब 8, नीचे 5 b₂]
भुजाएँ चित्र में अंकित संख्या से 5 गुना मिलीमीटर हैं।
इस आकृति में दो चतुर्भुज प्राप्त होते हैं। दोनों का क्षेत्रफल 32-32 वर्ग हाथ
है। ऊपर वाले चतुर्भुज की ऊपर वाली भुजा 5 तथा नीचे की भुजा 3 हाथ है। नीचे
वाले में ऊपर वाली भुजा 3 तथा नीचे की भुजा 5 हाथ है। दोनों में 8-8 हाथ का
शीर्ष लम्ब है।
यह समलम्ब चतुर्भुज का उदाहरण है। अतः यहाँ श्लोक 42 में प्रोक्त सूत्र
लागू होता है-
समलम्ब का क्षेत्रफल = ½ (b¹ + b²) × शीर्षलम्ब (h)
इसके अनुसार ⇒ ½ (5 + 3) × 8 = 4 × 8 = 32 वर्ग हस्त
वाले दो चतुर्भुज
वृत्ते सूत्रम्
वृत्तव्यासस्य कृतेर्मूलं परिधिर्भवति दशगुणायाः।
व्यासार्धवर्गवर्गात् क्षेत्रफलं दशगुणान् मूलम्।। 45।।
सुक्षेमा अनुवाद-वृत्त के व्यास की कृति या वर्ग को 10 से गुणित करके
उस सम्पूर्ण का वर्गमूल परिधि होती है। व्यास के आधे के वर्ग के वर्ग को
दशगुणित करके उसका वर्गमूल करने से वृत्त का क्षेत्रफल प्राप्त होता है।
अनुशीलन-प्रस्तुत श्लोक में वृत्त की परिधि तथा उसके आधार पर
क्षेत्रफल ज्ञात करने का प्रकार बताया गया है। इसके अनुसार परिधि का सूत्र इस
प्रकार होगा-
परिधि = √(10 × व्यास²) अथवा व्यास × 3 ¹⁶/₁₀₀ या व्यास × ³¹⁶/₁₀₀
इसके अनुसार व्यास तथा परिधि का अनुपात यह होगा-
1 : √10 अथवा 1 : 3.16 - - - -