सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 208 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 150

122 त्रिशतिका
3
16
न्यासः।। अत्र त्रिभुजद्वयम्। लब्धं फलम् 24
सुक्षेमा अनुवाद-वह बालेन्दु अर्थात् छोटा दो या तीन कलाओं वाला
चन्द्रमा, जिसके मध्य की लम्बाई 16 हाथ तथा बीच की चौड़ाई 3 हाथ है, यदि
इसे दो त्रिभुज से निर्मित प्रकल्पित किया जाय तो इनका क्षेत्रफल शीघ्र बताओ।
अनुशीलन-प्रस्तुत उदाहरण में बाल-चन्द्र का आकार बदल कर उपरिलिखित
चित्रानुसार १६ हाथ लम्बे तथा डेढ़-डेढ़ हाथ चौड़े दो त्रिभुज का रूप दे दिया
गया है।
पूर्व उल्लिखित सूत्रानुसार इन त्रिभुजों का क्षेत्रफल-
प्रथम त्रिभुज का क्षेत्रफल = ३/२ × १/२ × 16 = 48/4 = 12
द्वितीय त्रिभुज का क्षेत्रफल = ३/२ × १/२ × 16 = 48/4 = 12
दोनों त्रिभुजों से निर्मित बड़े त्रिभुज का क्षेत्रफल⇒12+12=24 वर्ग हस्त
तृतीयोदाहरणम्
वज्राकृतिनि क्षेत्रे भूवदने पञ्चहस्तके मध्ये।
विस्तारो हस्तत्रयमथ लम्बोऽष्टौ कियद् गणितम्।। 84।।
5
8
न्यासः।। अत्र चतुरस्रद्वयम्। 3 लब्धं फलम् 32
सुक्षेमा अनुवाद-वज्र की आकृति वाला क्षेत्र जिसके भू अर्थात् आधार-भुजा
तथा वदन या मुख अर्थात् ऊपर की भुजा 5-5 हाथ है तथा मध्य में 3 हाथ का
विस्तार है तथा जिस पर 8 हाथ का शीर्ष लम्ब है, यदि वह दो चतुर्भुज से निर्मित
मानी जावे१ तो उसका क्षेत्रफल क्या होगा।
१. 'कियत् फलं तस्य द्विचतुरश्रात्' पाटी-गणित सूत्र 133 के तुलनीय उद्धरण के अनुसार।