त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें118 त्रिशतिका
⇒ √((1300 + 2340) (2028 + 1500) / (975 + 3120)) ⇒ √(3640 × 3528 / 4095)
⇒ √(12841920 / 4095) ⇒ √3136 = 56 ⇐ विकर्ण BD
चक्रीय चतुर्भुज के लिये विकर्णों की यह परिमाप सही है। क्योंकि इसके
नियमानुसार—
63 × 56 = 25 × 60 + 39 × 52
⇒ 3528 = 1500 + 2028 = 3528
m विकर्ण के द्वारा यहाँ △ ABD तथा △ BCD ये दो त्रिभुज प्राप्त होते
हैं। श्रीधर के त्रिभुज के प्रथम सूत्र के अनुसार इनका अलग-अलग क्षेत्रफल प्राप्त
करके इन्हें जोड़ने पर चतुर्भुज का क्षेत्रफल प्राप्त होगा। इस प्रकार—
△ ABD का भुजयुतिदल या s = ½ (39 + 25 + 56) = 60
क्षेत्रफल = √(60 × 21 × 25 × 4) = √176400 = 420
△ BCD का भुजयुतिदल या s = ½ (60 + 52 + 56) = 84
क्षेत्रफल = √(84 × 24 × 32 × 28) = √1806336 = 1344
दोनों के योग से चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 1764 वर्ग हस्त
63 परिमाप वाले n विकर्ण को खींचने से प्राप्त 2 त्रिभुजों को जोड़ने पर
भी ठीक यही परिणाम प्राप्त करते हैं—
△ ABC का भुजयुति दल या s = ½ (63 + 25 + 52) = 70
इसका क्षेत्रफल = √(70 × 7 × 45 × 18) = √396900 = 630
△ ADC का भुजयुति दल या s = ½ (63 + 39 + 60) = 81
इसका क्षेत्रफल = √(81 × 18 × 42 × 21) = √1285956 = 1134
दोनों के योग से चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 1764
इस प्रकार चक्रीय चतुर्भुज के सूत्र के परिणाम को पुनः प्राप्त कर लिया ,
गया है।
श्रीधराचार्य के त्रिभुज के दूसरे सूत्र द्वारा भी हम यही परिणाम प्राप्त करते
हैं। पर उसके लिये पहले त्रिभुज के लम्ब या आबाधा को जानना आवश्यक होगा।
एक विकर्ण के सापेक्ष दूसरे विकर्ण का एक खण्ड (segment) आबाधा या