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त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 208 में से

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पृष्ठ 144

116 त्रिशतिका
यहाँ श्रीधर ने ब्रह्मगुप्त की भावना को स्वीकार करते हुए इसे चतुर्भुज तथा
त्रिभुज में समान रूप से लागू होने वाला सूत्र बताया है। इन्होंने अपनी पाटी-गणित
में इस मान्यता का विस्तार करते हुए कहा है कि यह सूत्र सभी वर्ग-चतुर्भुज, सभी
प्रकार के विषम-लम्ब चतुर्भुज में भी समन्वित होता है¹।
आगे चलकर इस तथ्य की न्यूनता का अनुभव कर लिया गया था। आर्यभट
द्वितीय तथा भास्कराचार्य ने अत्यन्त स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी प्रकार के विषम
लम्ब चतुर्भुजों में विकर्ण (diagonal) खींचे बिना इसका सूक्ष्म क्षेत्रफल प्राप्त नहीं
किया जा सकता। आधुनिक गणित में यह मान्य है कि ब्रह्मगुप्त तथा श्रीधर का
यह सूत्र केवल चक्रीय चतुर्भुज (cylic quadrilaterals) के लिये ही पूर्ण रूप से
सही उतरता है।
आगे श्रीधराचार्य ने सावधानी पूर्वक ऐसे ही चतुर्भुज का उदाहरण दिया है,
जिसमें यह सूत्र सही प्रकार समन्वित हो सके-
उदाहरणम्
पञ्चकृतिर्यस्य मुखं षष्टिर्भूमिर्भुजौ त्रयोदशकरौ।
त्रिचतुर्गुणौ यथाक्रममृजुनि सखे तस्य किं गणितम्।। 80।।
न्यासः
25
39 52
60
लब्धं फलम् 1764 पूर्वोक्तचतुरस्रस्य त्र्यस्रस्यापि फलं तदेव।
सुक्षेमा अनुवाद-हे मित्र, जिस चतुर्भुज की सम्मुख भुजा 5 का वर्ग अर्थात्
25, आधार 60 तथा पार्श्व भुजाएँ क्रमशः 13 × 3 = 39 तथा 13 × 4 = 52 हाथ
हैं, उसका क्षेत्रफल क्या होगा।
अनुशीलन-इसके क्षेत्रफल के लिये पूर्वोक्त प्रथम सूत्र समन्वित करने
पर-
१. सदृशासमलम्बानामसदृशलम्बे विषमबाहौ। - पाटी-गणित, क्षेत्रव्यवहार, श्लोक 11