त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 115
अंकित संख्याएँ मिलीमीटर के ठीक अनुरूप हैं।
यहाँ AC विकर्ण द्वारा प्राप्त दोनों त्रिभुजों के सूत्रानुसार क्रमशः क्षेत्रफल-
ABC का क्षेत्रफल 39/2 × 24 = 468 हाथ²
ACD का क्षेत्रफल 25/2 × 24 = 300 हाथ²
अतः चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 468 + 300 = 768 हाथ²
लम्बज्ञानाय सूत्रम्
भुजयुतिदलं चतुर्धा भुजहीनं तद् वधात् पदं गणितम्।
चतुरस्रे त्र्यस्रे वा क्षेत्रे कुदलं च लम्बहतम्॥ 43॥
सुक्षेमा अनुवाद-चतुर्भुज या त्रिभुज का क्षेत्रफल प्राप्त करने के लिये चारों
भुजाओं के माप को जोड़े तथा उसका आधा करे। इस फल को चार बार रख कर
प्रत्येक बार फल से अलग-अलग भुजा को घटावें। इन प्राप्त संख्याओं को आपस
में गुणित करके इनका पद या वर्गमूल प्राप्त करे। प्राप्त फल ही चतुर्भुज या त्रिभुज
का गणित या क्षेत्रफल होता है।
अथवा त्रिभुज का क्षेत्रफल प्राप्त करने के लिये 'कु' या आधार भुजा का
दल या ½ को शीर्षलम्ब से गुणित करे।
अनुशीलन-इस सूत्र में एक ही नियम से चतुर्भुज तथा त्रिभुज का क्षेत्रफल
जानने का प्रयास किया गया है¹। इसके अनुसार त्रिभुज एक ऐसा चतुर्भुज है,
जिसकी एक भुजा d = 0 हो। इस दशा में यदि चारों भुजाओं को a, b, c, d नाम
दें तथा भुज-युति-दल या semi-perimeter को s कहें तो सूत्र यह होगा-
चतुर्भुज का क्षेत्रफल = √((s-a) (s-b) (s-c) (s-d))
त्रिभुज में क्योंकि d = 0 है, अतः इसके क्षेत्रफल को
√((s-a) (s-b) (s-c) (s-0)) इस प्रकार प्रकट करेंगे। अतः सूत्र-
त्रिभुज का क्षेत्रफल = √(s (s-a) (s-b) (s-c))
द्वितीय नियम के अनुसार सूत्र इस प्रकार होगा-
त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ आधार × शीर्षलम्ब अथवा ½ b × h
१. चतुर्भुज या त्रिभुज के क्षेत्रफल का सूक्ष्म फल ज्ञात करने का यह सूत्र मूलतः ब्रह्मगुप्त से
प्राप्त किया गया है-
भुजयोगार्धचतुष्टयभुजोनघातात् पदं सूक्ष्मम्। - ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त 12.21