त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें112 त्रिशतिका
समलम्ब का क्षेत्रफल = ½ (समान्तर रेखाएँ क्रमशः 'कु' + 'मुख') ×
शीर्षलम्ब (h)
उदाहरणम्
यस्य द्विकरमुखमृजु लम्बो द्वादश चतुष्कृतिर्भूमिः।
त्रिकपञ्चकसहिता दश पार्श्वभुजौ तस्य किं गणितम्।। 77।।
न्यासः 2 लब्धं फलम् 108
13 12 15
5 2 9
16
सुक्षेमा अनुवाद-जिस समलम्ब चतुर्भुज की समान्तर भुजाओं में से मुख
या ऊपर की भुजा (b₂) 2 हाथ है तथा भूमि या आधार भुजा (b₁) 4² अर्थात् 16
हाथ है तथा उस पर सरल रेखा में 12 हाथ का शीर्षलम्ब खींचा गया है। इसकी
पार्श्व की असमान्तर भुजाएँ क्रमशः 13 तथा 15 हाथ हैं। ऐसे चतुर्भुज का क्षेत्रफल
क्या होगा।
अनुशीलन-त्रिशतिका में वर्णित चित्र में अंकित संख्या तिगुने मिलीमीटर
हैं। यहाँ आधार रेखा 'कु' 16 तथा इसके समान्तर मुख रेखा 2 हाथ वाली है इसमें
12 हाथ का शीर्षलम्ब है। अतः सूत्रानुसार-
½ (16 + 2) × 12 = 9 × 12 = 108 वर्ग हस्त
इसकी उपपत्ति के लिये आगे प्रदर्शित चित्र के अनुसार इनके 3 अलग-अलग
आयत का रूप देते हैं-
प्रथम आयत का क्षेत्रफल = 12 × 5 = 60 वर्ग हस्त
द्वितीय आयत का क्षेत्रफल = 12 × 2 = 24 वर्ग हस्त
तृतीय आयत का क्षेत्रफल = 12 × 9 = 108 वर्ग हस्त
प्रथम तथा तृतीय आयत का आधा त्रिभुज है। अतः
प्रथम त्रिभुज का क्षेत्रफल = ⁶⁰⁄₂ = 30 वर्ग हस्त