त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें102 त्रिशतिका
नापियाँ मिलीमीटर में हैं।
यहाँ दिनों की संख्या या गच्छ को शीर्षलम्ब बताया है१। यह समलम्ब
चतुर्भुज है। अतः इसके लिये पाटी-गणित का यह नियम प्राप्त करते हैं-
श्रेढ़ीक्षेत्रे तु फलं भूमुखयोगार्धलम्बहतिः
अर्थात् इस आकार का श्रेढ़ी फल आधार भुजा तथा इसकी सम्मुख भुजा
के योग के आधे का शीर्षलम्ब से गुणन द्वारा प्राप्त होता है। स्पष्टतः यह समलम्ब
चतुर्भुज के क्षेत्रफल का सूत्र है तथा यह पूर्वोक्त सर्वधन के सूत्र के ठीक समतुल्य
बैठता है।
त्रिशतिका सूत्र 42 पृ. 84 में भी अन्य शब्दों में यही सूत्र प्रस्तुत किया है।
इस चतुर्भुज में 20 × 7 का एक आयत तथा 15/2 × 7 के दो त्रिभुज हैं। इन
दोनों के सूत्रों को मिलाने पर हम पुनः वही 7 (15 + 20) = 245 क्षेत्रफल प्राप्त
करते हैं। इस प्रकार 15 + 20 = 35 यह प्रतिदिन के दान का औसत या मध्यधन
प्रकट होता है।
निम्नांकित तालिका से भी प्रकट है कि यही प्रतिदिन के दान का औसत
है-
समान क्रम ⟹ 20 25 30 35 40 45 50 = 245
विपरीत क्रम ⟹ 50 45 40 35 30 25 20 = 245
योग ⟹ 70 70 70 70 70 70 70 = 490
यहाँ दोनों क्रम से लिखी संख्याओं का योग एक समान 490 होने से प्रकट
है कि परिमाण समान है। साथ ही प्रथम 20 + 50 = 70 स्पष्टतः a + ℓ है। आगे
भी सभी का योग 70 होने से सिद्ध है कि ये सभी जोड़े a + ℓ के समकक्ष हैं।
तालिका से यह भी प्रकट है कि सम्पूर्ण दिनों की संख्या या n से गुणित a + ℓ
श्रेढ़ीफल का दुगुना 490 है। अतः निश्चय ही श्रेढ़ी फल n गुणित a + ℓ का ½
होगा। सूत्र में यही प्रकट किया गया है। यह a + ℓ का ½ मध्यधन ही है। अतः
n गुणित मध्यधन को भी सर्वधन कहा जा सकता है। सूत्र में यही प्रकट किया
गया है।
१. गच्छसमो लम्बकस्तस्य - पाटी-गणित सूत्र 79, पृ. 107