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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 208 में से

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पृष्ठ 129

त्रिशतिका 101
यहाँ प्रथम दिन दी गई 20 हरड़ आदिधन (a) है, प्रतिदिन अतिरिक्त दी
जाने वाली संख्या उत्तर या चय (d) 5 है, दिनों की कुल संख्या पद या गच्छ (n)
7 है। इस स्थिति में उपर्युक्त सूत्र का प्रयोग करने पर–
5 (7-1) + 20 = 50 अन्त्यधन
यह अन्त्यधन का सर्वथा समुचित सूत्र है। क्योंकि वह घोड़ा निम्न क्रम से
हरड़ प्राप्त करता है–
प्रथम दिन, द्वितीय दिन, तृतीय दिन, चतुर्थ दिन, पञ्चम दिन, षष्ठ दिन, सप्तम दिन
a, (a + d), (a + 2d), (a + 3d), (a + 4d), (a + 5d), (a + 6d)
20, 20+5=25, 20+10=30, 20+15=35, 20+20=40, 20+25=45, 20+30=50
तालिका से स्पष्ट है कि प्रत्येक दिन तथा अन्तिम 7वें दिन भी nवें दिन
से 1 कम से गुणित उत्तर (d) के साथ आदिधन (a) संयुक्त है। अतः प्रस्तुत सूत्र
में यही कहा गया है।
प्रस्तुत उदाहरण में मध्य दिन चतुर्थ दिन है। अन्त्यधन के उपाय से मध्यधन
जानने के प्रस्तुत सूत्र अनुसार–
(20 + 50) / 2 = 35 मध्यधन
इसी प्रकार सातों दिन में कुल हरड़ सर्वधन जानने के लिये उपर्युक्त सूत्र
का प्रयोग करने पर–
7 (20 + 50) / 2 = 245 अथवा 7 × 35 = 245 सर्वधन
पाटी-गणित में सर्वधन के सूत्र में अन्त्यधन का सम्पूर्ण सूत्र सम्मिलित
करते हुए सूत्र भी प्रदान किया है।¹ उससे अन्ततः यही पूर्वोक्त सूत्र प्राप्त होता है–
सर्वधन = n (a + ℓ) / 2
पाटी-गणित में इस स्थिति को ज्यामितीय समलम्ब चतुर्भुज (trapazium)
का रूप देते हुए एक ऐसे ‘शराव’ नामक पात्र से तुलना की है, जिसकी आधार
भुजा छोटी तथा सम्मुख भुजा बड़ी हो। प्रस्तुत उदाहरण में आदिधन 20, अन्त्यधन
50 तथा दिनों की संख्या 7 मान कर यह चित्र प्रस्तुत करते हैं–
१. व्येकपदार्धघ्नचयः सादिः पदसंगुणो भवेद् गणितम्॥ - पाटी-गणित सूत्र 85, पृ. 110
तुल. आर्यभटीय गणितपाद 1.19, ब्रा.स्फु.सि. 12.17 ग.सा.सं. 2.61 तथा 6.290, ग.कौ.
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