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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 208 में से

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पृष्ठ 128

100 त्रिशतिका
मध्य-धन, मध्य का धन या संख्या, middle term m
सर्वधन या गणित, सम्पूर्ण धन या संख्या, sum of terms s
उत्तर या चय या प्रचय, प्रत्येक संख्या के साथ क्रमशः
जोड़ी जाने वाली संख्या, common difference d
पद या गच्छ, संख्याओं की गणना, number of terms n
प्रस्तुत श्लोक में अन्त्यधन, मध्यधन तथा सर्वधन प्राप्त करने के सूत्र बताए
गए हैं। इनके लिये अन्य पारिभाषिक शब्दों का भी उपयोग है। अन्त्यधन आदि के
सूत्र को हम इस प्रकार प्रकट कर सकते हैं-
अन्त्यधन = उत्तर (पद – 1) + आदिधन
अथवा 𝑙 = d (n – 1) + a
मध्यधन = आदिधन + अन्त्यधन
————————————————
2
अथवा m = a + 𝑙
———————
2
सर्वधन = पद (आदिधन + अन्त्यधन) अथवा पद × मध्यधन
—————————————————————
2
अथवा s = n (a + 𝑙) अथवा s = n × m
——————————
2
उदाहरणम्
प्रथमेऽह्नि हरीतक्या दीयेताश्वस्य विंशतिर्यस्य।
पञ्चकचयेन दत्ताः कति ता दिनसप्तकेन स्युः॥ ७३॥
न्यासः।। आदिः 20। उत्तरः 5। गच्छः 7। लब्धमन्त्यदिने हरीतक्यः 50।
मध्ये 35। सर्वहरीतक्यः 245।
सुक्षेमा अनुवाद-प्रथम दिन घोड़े को 20 हरड़ दी गई। उसके पश्चात्
अगले 7 दिनों तक प्रतिदिन क्रमशः 5-5 हरड़ बढ़ाकर दी गई। तो सातवें दिन तथा
बीच वाले दिन कितनी दी गईं। इस प्रकार 7 दिनों में कुल कितनी हरड़ प्रदान की
गई।
अनुशीलन-यहाँ उपर्युक्त क्रम से सातवें दिन प्राप्त की गई हरड़ 'अन्त्य-ध
न' कही जावेगी।