त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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7 : 1 : : 14/37 : x ...x = 14 × 1 / (37 × 7) = 2/37 सोंठ का मूल्य
1 रूप कुल मूल्य
स्पष्टतः यहाँ श्लोक के अनुसार पूर्वोक्त संक्रिया की गई है।
उपर्युक्त सम्पूर्ण नियम बीजगणितीय सामान्य समीकरण से आसानी से सिद्ध
है-
यदि x = एक रूप से प्राप्त होने वाली तीनों वस्तुओं की बराबर अज्ञात मात्रा-
मूल्य चुकाया गया ⇒ 1 रूप
यदि x × 2/1 + x × 1/2 + x × 1/7 = 1 रूप
⇒ x (2/1 + 1/2 + 1/7) = 37/14 x = 1 रूप
प्रश्नानुसार ⇒ 37/14 x = 1 रूप
⇒ x = (14 × 1) / 37 = 14/37 पल
इस प्रकार 14/37 पल ही वह समान मात्रा है जिसके अलग-अलग मूल्यों का योग कुल 1 रूप प्राप्त होता है।
14/37 × 4 = 56/37 = 1 19/37 कर्ष
19/37 × 16 = 304/37 = 8 8/37 माष
8/37 × 5 = 40/37 = 1 3/37 गुंजा
अतः 3/37 गुंजा भाग
विषमक्रयोदाहरणम्
मुद्गाना कुडवाः सप्त लभ्यन्ते नवभिः पणैः।
पणेन कुडवस्यार्धं तण्डुलानामवाप्यते॥ ७१॥
ततः पणत्रयं सार्धं गृहीत्वाशु वणिङ् मम।
तण्डुलानां प्रयच्छाशु मुद्गाना चार्थसंगुणम्१॥ ७२॥
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 73-74