त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 93
प्रक्षेप या मूलधन ⇒ 2 । 3 । 4 । 5
इनका योग = 14
मूलधन के योग से एकक मात्रा का विभाग 2/14 = 1/7,
1/7 × 210 = 210/7 = 30 प्रथम खेत की उपज
इसके समानुपात से इस प्रकार हल प्राप्त होते हैं –
14 : 210 : : 2 : x अतः x = (210 × 2)/14 = 420/14 = 30
14 : 210 : : 3 : x x = (210 × 3)/14 = 630/14 = 45
14 : 210 : : 4 : x x = (210 × 4)/14 = 840/14 = 60
14 : 210 : : 5 : x = (210 × 5)/14 = 1050/14 = 75
द्वितीयोदाहरणम्
शतस्य लब्धवानेकः पञ्चशत्यास्तथापरः।
फलमन्यः सहस्रस्य सहस्रे षट्शताधिके।। ६८।।
सर्वग्रामफले विद्वन् तत्रोत्पन्नं शतद्वयम्।
ततः किं कस्य भागे स्याद् गणयित्वा निगद्यताम्।। ६९।।
न्यासः 100। 500। 1000। सर्वग्रामफलम् 1600। सर्वोत्पत्तिः 200। लब्धं
पृथक्-पृथक् फलम् 25/2 । 62 ½ । 125
इति प्रक्षेपकप्रकरणम्
सुक्षेमा अनुवाद-हे विद्वन्! सम्पूर्ण ग्राम के कुल 1600 परिमाण के खेत
में एक ने 100, दूसरे ने 500 तथा तीसरे ने 1000 परिमाण वाले खेत से उपज
प्राप्त की। कुल उपज 200 प्रस्थ हुई। तो किसने कितने प्रस्थ अनाज प्राप्त किया।
अनुशीलन-यह भी समानुपात का प्रश्न है। अतः यह मान लिया गया है
कि सभी खेत समान रूप से उपजाऊ थे। श्लोक के नियमानुसार-
100/1600 × 200 = 1/16 × 200 = 200/16 = 12 ½