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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 208 में से

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पृष्ठ 120

92 त्रिशतिका
न्यासः 12 10 8
3 4 7 पक्वसुवर्णवर्णाः 11, लब्धं सुवर्णाः 12
सुक्षेमा अनुवाद-12, 10 तथा 8 वर्ण वाले क्रमशः 3, 4 तथा 7 माष के
सुवर्ण वह्नि में तपने पर 11 वर्ण के हो जाते हैं। उनकी अब कितनी मात्रा रह गई,
बताओ।
अनुशीलन-पूर्वोक्त विवरण के अनुसार सोने का वर्ण जितना बढ़ता है,
मात्रा उतनी ही घटती है। अतः यहाँ वर्ण से भाग देने पर मात्रा ज्ञात होगी। अतः-
12 × 3 + 10 × 4 + 8 × 7 36 + 40 + 56 132
───────────────────────── = ──────────────── = ─── = 12
11 11 11
प्रक्षेपक-करण-सूत्रम्
स्वयुतिहृतप्रक्षेपान् फलेन हन्यात् पृथक् फलावाप्त्यै॥
सुक्षेमा अनुवाद-प्रक्षेप¹ अर्थात् खेत में छितराए गए बीज या मूलधन के
योग से 'प्रक्षेप' या मूलधन की अलग-2 मात्रा को विभक्त करके सम्पूर्ण फल या
मिश्रधन से गुणित करने पर अलग-2 फल या उपज ज्ञात होती है।
द्वौ त्रयः पञ्च चत्वारः प्रस्था बीजस्य वापिताः।
शतद्वयं दशोपेतं तत्र किं स्यात् पृथक् फलम्²॥ ६७॥
न्यासः 2 । 3 । 4 । 5 फलम् 210 लब्धं पृथक्-पृथक् फलम् 30 । 45 । 60 ।
75 ।।
सुक्षेमा अनुवाद-अलग-अलग खेतों में क्रमशः 2, 3, 4 तथा 5 प्रस्थ बीज
डाले गए। उन खेतों में कुल मिलाकर 210 प्रस्थ धान्य तैयार हुए। अलग-अलग
खेतों में कितनी-कितनी उपज हुई।।
अनुशीलन-यहाँ खेती से सम्बन्धित प्रश्न दिये गए हैं। इनकी विधि से
लाभ, साझा (share) के वाणिज्य विषयक प्रश्नों को भी हल किया जा सकता है।
इन सबमें समानुपात को खोजा गया है। श्लोक के नियमानुसार प्रश्न का हल-
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१. प्रक्षिप्यते उप्यते सन्तन्यते इति प्रक्षेप्यो बीजं, तत उत्पत्तिः फलम्। - पाटी गणित सूत्र 59 पर
टीका
तुल. ब्रा.स्फु.सि. 12.16, सि.शे. 13.19, लीलावती मिश्रक व्यवहार श्लोक 13
२. तुल. पाटी-गणित उदा. 71