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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 118, कुल 208 में से

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पृष्ठ 118

90 त्रिशतिका
द्वितीयोदाहरणम्
सार्धैकादशदशकार्धाष्टमवर्णाः क्व वर्णके योगात्।
अर्धषडंशार्धान्वित-पञ्च-चतुः-सप्त-माषाः स्युः¹॥ ६४॥
11 10 7
न्यासः ½ 1 ½ लब्धमावर्ते वर्णाः 9 ⁴⁰/₁₀₃ ।।
5 4 7
1 1 1
2 6 2
सुक्षेमा अनुवाद-11½ = ²³/₂, ¹⁰/₁, तथा 7½ = ¹⁵/₂ वर्ण वाले क्रमशः अर्धयुक्त
5 अर्थात् ¹¹/₂, छठे अंश से युक्त 4 अर्थात् ²⁵/₆ तथा अर्धयुक्त 7 अर्थात् ¹⁵/₂ माष के सुवर्ण
को मिलाने से निर्मित सुवर्ण का वर्ण क्या होगा।
अनुशीलन-पूर्वोक्त नियमानुसार-
²³/₂ × ¹¹/₂ + ¹⁰/₁ × ²⁵/₆ + ¹⁵/₂ × ¹⁵/₂ = ²⁵³/₄ + ²⁵⁰/₆ + ²²⁵/₄
= (1518 + 1000 + 1350) / 24 = 3868 / 24
¹¹/₂ + ²⁵/₆ + ¹⁵/₂ = (33 + 25 + 45) / 6 = 103 / 6
³⁸⁶⁸/₂₄ × ⁶/₁₀₃ = ²³²⁰⁸/₂₄⁷₂ = (23208 ÷ 24) / (2472 ÷ 24) = ⁹⁶⁷/₁₀₃ = 9 ⁴⁰/₁₀₃ सुवर्ण का वर्ण
पक्वसुवर्णस्य वर्णसुवर्णयोः परिज्ञानाय सूत्रम्
वर्णसुवर्णवधैक्यं विपक्वकनकेन भाजितं वर्णः।
वर्णेन हृतं तु भवेत् तदेव परिपक्ववह्निभवम्²॥ ३७॥
सुक्षेमा अनुवाद-सुवर्ण के वर्ण को उनकी अलग-2 मात्रा से गुणित करके
उनके योग को पक्व सुवर्ण की मात्रा से विभाजित करने से वर्ण का परिज्ञान होगा।
उस योग को सुवर्ण के वर्ण से विभाजित करने पर परिपक्व वह्नि में निर्मित सोने
की मात्रा जानी जावेगी।
अनुशीलन-इससे पूर्व श्लोक में सोने की मात्रा के योग से विभक्त करने
पर सोने के वर्ण का परिज्ञान बताया है। सोने को आग में गलाने पर उसकी मात्रा
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 62, ग.सा.सं. 6.170
२. तुल. पाटी-गणित सू. 53, ग.सा.सं. 6.175, म.सि. 15.40