त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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त्रिशतिका 89
सुक्षेमा अनुवाद-सोने के अलग-२ वर्णों को सोने की अपनी-२ मात्रा से
गुणित करके उनके योग को सोने की मात्रा के योग से विभक्त करने पर सोने का
वर्ण (fineness) ज्ञात होता है।
द्वादश दश चैकादश वर्णा नव पञ्च षोडश सुवर्णाः।
कनकस्य समावर्ते जायन्ते वर्णकाः केऽस्मिन्१॥ ६३॥
न्यासः 12/9 10/5 11/16 लब्धमावर्ते वर्णाः 11 २/१५
सुक्षेमा अनुवाद-12, 10 तथा 11 वर्ण वाले क्रमशः 9, 5 तथा 16 माष के
सुवर्ण को समावर्त अर्थात् मिला देने पर निर्मित सुवर्ण का क्या वर्ण होगा। अथवा
उसकी शुद्धता कितने वर्ण (carat) की होगी।
अनुशीलन-श्लोक के नियमानुसार-
(12 × 9 + 10 × 5 + 11 × 16) / (9 + 5 + 16) = 334/30 = 11 4/30 = 11 → २/१५ सुवर्ण का वर्ण