त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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88 त्रिशतिका
अन्यदुदाहरणम्
पूर्वोक्तैरेव फलैः शतस्य रूपार्धसंयुतैः क्रमशः।
मासैश्च पक्षयुक्तैः कथय कथं पत्रमेकं स्यात्॥ ६२॥
कृतभागानुबन्धे न्यासो यथा
1/1 9/2 1/1 13/2 1/1 21/2 1/1 17/2 लब्धमतीतकालः
100 100 100 200 100 300 100 400 मासाः 8। दिनानि16
1 1 1 1 1 1 1 1
5/2 7/2 9/2 11/2 शतफलम् 4½
लब्धं मूलधनम् 1000। यद्यतीतकाले दिनभागा भवन्ति ततस्तेषामृणिना
धनिनः कलान्तरं दत्वा दिनभागानपास्यैकपत्रं क्रियत इति
सुक्षेमा अनुवाद-पूर्वोक्त ब्याज की दरों में आधा या ½ संयुक्त करके
अर्थात्