त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें84 त्रिशतिका
उदाहरण-
905 × 100 × 1
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100 × 1 + (5 + 1 + ½ + ¼) 12 = 90500 = 500 मूलधन
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मिश्रधन × परकाल × प्रमाणफल
ब्याज= ──────────────────────────────────────────────────────────
प्रमाण धन × प्रमाणकाल + (सभी प्रमाणफलों का योग)×परकाल
उदाहरण-
905 × 12 × 5
─────────────────────────────
100 × 1 + (5 + 1 + ½ + ¼) 12 = 54300 = 300 ब्याज
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181
भाव्यक का धन =
100/=पर 1 मास में 1/=
100/=पर 12 मास में 12/=
500/=पर 12 मास में 12×5=60 रूप
अन्य के धन भी इसी प्रकार प्राप्त हैं। इन सभी सूत्रों की उपपत्ति पूर्वोक्त
सूत्र नं. 33 में वर्णित ऐकिक नियम के समान है।
एकपत्रीकरणसूत्रम्
गतकालफलसमासो मासफलैक्योद्धृतो भवेत् कालः।
शतगुणमासफलैक्ये धनयोगहृते शतस्य फलम्¹॥ ३५॥
सुक्षेमा अनुवाद-अतीत काल के समस्त फल अर्थात् कुल ब्याज (I) को
मास फल याने 1 महीने के ब्याज से विभक्त करने पर अतीत काल या ब्याज के
कुल महीने ज्ञात होते हैं। (तालिका नं. 8)
(II) 100 से गुणित मास फल या कुल महीने के ब्याज को मूलधन से
विभक्त करने पर 100/= का फल या ब्याज प्राप्त होता है। (तालिका नं. 9)
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१. तुल. पाटी-गणित सू. 51, ग.सा.सं. 6.77, ग.ति.पृ. 86