त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 85
उदाहरणम्
द्विके त्रिके चतुष्के च दत्तं स्वं पञ्चके शतम्।
एकं द्वे त्रीणि चत्वारि शतान्येषां यथाक्रमम्॥ ६०॥
द्वौ त्रयं पञ्च चत्वारो गता मासा द्विसंगुणाः।
तत्कथं कथ्यतामेतैरेकं पत्रं भविष्यति१॥ ६१॥
1/1 4/1 1/1 6/1 1/1 10/1 1/1 8/1
न्यासः 100 100 100 200 100 300 100 400
1 1 1 1 1 1 1 1
2/1 3/1 4/1 5/1
लब्धमतीतकालो मासाः 8 । दिनानि 3 । शतस्य फलम् 4 मूलधनम् 1000॥
सुक्षेमा अनुवाद- 2/= , 3/= , 4/= , 5/= सैकड़ा
मासिक की दर से क्रमशः 100/= , 200/= , 300/= , 400/= रूप
उधार दिये गए। इन कर्जों पर क्रमशः 2×2 = 4 , 2×3 = 6 , 2×5 = 10 ,
2×4 = 8 महीने बीत गए। तो इनका विवरण मूलक पत्र कैसे तैयार होगा। बताओ।
अनुशीलन-विवरण-पत्र आगे अंकित है। इसमें तालिका नं. 1 से 5 तक
'न्यास' के क्रम से प्रमाण-काल आदि का विवरण है। तालिका नं. 6, 7 में
पाटी-गणित व्याख्या के अनुसार वर्णन है। तालिका नं. 8, 9 में श्लोक के अनुसार
विवरण है-
१. प्रथमपत्रे गतकालफलं (तालिका 6), ...प्रतिपत्रं मासफलानि यथा...(तालिका नं. 7)
पाटी-गणित व्याख्या उदा. 57