त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें82 त्रिशतिका
1 महीने में 1 रूप का ब्याज 6/5 × 2/201 = 12/1005 = 4/335 रूप
1 महीने में 100 रूप का ब्याज 4/335 × 100 = 400/335 = 80/67 रूप
अब प्रश्न का आकार यह है-
80/67 रूप सैकड़ा मासिक ब्याज की दर से 15/2 मास में 73/2 मिश्रधन होता है।
तो इसका मूलधन तथा ब्याज बताओ।
पूर्वोक्त सूत्रानुसार-
(73/2 × 100 × 1) / (100 × 1 + 15/2 × 80/67) = 3650 / (100 + 600/67) = 3650 / (7300 / 67)
= 3650 × 67/7300 = 244550 / 7300 = 33½ रूप मूलधन
इसी प्रकार
(73/2 × 15/2 × 80/67) / (100×1 + 15/2 × 80/67) = (43800 / 134) / (7300 / 67) = 21900/67 × 67/7300 = 3 रूप ब्याज
ऐकिक नियम से यह हल आसानी से प्राप्त है। पूर्वोक्तानुसार-
1 महीने में 1 रूप का ब्याज 4/335
7½ महीने में 1 रूप का ब्याज 4/335 × 15/2 = 60/670 = 6/67
अतः 7½ महीने का मिश्रधन 1 + 6/67 = 73/67
73/67 मिश्रधन पर 1 रूप मूलधन
तो 73/2 मिश्रधन पर मूलधन 73/67 : 1 : : 73/2 : x
⇒ x = 73/2 × 67/73 = 67/2 = 33½ रूप मूलधन
तथा 73/2 - 67/2 = 6/2 = 3 रूप ब्याज
अथ भाव्यक सूत्रम्
कालप्रमाणघातो गतकालहताः फलादयश्चैते।
स्वयुतिहता मिश्रगुणा भवन्ति मूलादयः क्रमश:¹।। ३४।।
१. तुल. परकालहता: - पाटी-गणित सू. 48, ग.ति.पृ. 83, सि.शे. 13.18