त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 81
समानुपात के सूत्रानुसार—
160 x = 100×96
x = 100×96 / 160 = 9600 / 160 = 60/= मूलधन
इसी प्रकार 160/= मिश्रधन के अन्तर्गत का 60/= ब्याज होने पर 96/=
मिश्रधन के आधार पर मिश्रधन तथा ब्याज का यह समानुपात प्राप्त होता है—
160 : 60 : : 96 : x
160 x = 60×96
x = 60×96 / 160 = 5760 / 160 = 36/= ब्याज
इस प्रकार हमने समीकरण के सामान्य उपाय से पुनः वही सूत्र प्राप्त कर
लिया है।
अथ भिन्नोदाहरणम्
सार्धस्य शतस्य फलं सपादमासेन रूपमध्यर्धम्।
फलमूलैक्यं षट्कृतिरर्धयुतार्धाष्टमैर्मासैः१॥ ५८॥
न्यासः 5/4 15/2
201/2 73/2 लब्धं मूलधनम् 33
3/2 ½ वृद्धिः 3
इति मिश्रव्यवहारः।
सुक्षेमा अनुवाद-1¼ = 5/4 महीने में 100½ = 201/2 रूप का ब्याज 1½ =
3/2 रूप होता है तो 7½ = 15/2 मास में 6² = 36 तथा ½ = 73/2 मिश्रधन का मूलधन
तथा ब्याज क्या होगा।
यहाँ पूर्वोक्त सूत्र को समन्वित करने से पहले राशियों को समानुपात में
स्थापित करते हैं—
5/4 महीने में 201/2 रूप का ब्याज 3/2/= रूप
1 महीने में 201/2 रूप का ब्याज 3/2 × 4/5 = 12/10 = 6/5 रूप
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१. तुल. पाटी-गणित उदा. 53