सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 208 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 108

80 त्रिशतिका
प्रमाण काल (standard period = y), 1 वर्ष या 12 महीना परकाल (time),
96/= रु. मिश्रधन (Amount) है। अब पूर्वोक्त सूत्र के अनुसार–
मूलधन = 96×100×1 / (100×1+12×5) = 9600 / 160 = 60
ब्याज = 96×12×5 / (100×1+12×5) = 5760 / 160 = 36
यह सूत्र मूलतः समानुपात से सम्बन्धित है। अतः उन नियमों से इसे प्राप्त
किया जा सकता है। इसके लिये पहले 100/= मूलधन पर 5/= सैकड़ा मासिक
ब्याज की दर से मिश्रधन ज्ञात करते हैं–
100/= मूलधन पर 5/= सैकड़ा मासिक ब्याज की दर से 12 मास का
ब्याज 12 × 5 = 60
अतः 100/= का मिश्रधन 100×1+12×5 = 160
160/= मिश्रधन पर 100/= मूलधन
1/= मिश्रधन पर 100×1 / (100×1+12×5) = 100 / 160
96/= मिश्रधन पर 96×100×1 / (100×1+12×5) = 9600 / 160 = 60 मूलधन
इस प्रकार हमने मूलधन का ज्ञान करते हुए ठीक उपरिलिखित सूत्र प्राप्त
कर लिया है।
अब 160/= मिश्रधन पर 12×5 = 60/= ब्याज
1/= मिश्रधन पर 12×5 / (100×1+12×5) = 60 / 160 ब्याज
96/= मिश्रधन पर 96×12×5 / (100×1+12×5) = 5760 / 160 = 36 ब्याज
इस प्रकार पुनः वही सूत्र प्राप्त हो गया है।
यहाँ 160/= मिश्रधन का प्रश्नोक्त समय तथा दर के हिसाब से 100/=
मूलधन प्राप्त किया गया है। इस अनुपात की 96 मिश्रधन के आधार पर समानुपात
की खोज की गई है। इस प्रकार हमें यह अनुपात प्राप्त होता है–
160 : 100 : : 96 : x