सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 208 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 107

त्रिशतिका 79
पश्चात् प्रमाणफल (rate) को परकाल (time) से गुणा करे। इन दोनों गुणनफल
को जोड़ देवे। पश्चात् इस गुणनफल से मिश्रधन (Amount) प्रमाण राशि (SP)
प्रमाण काल (y) के गुणनफल को विभक्त करें। इससे मूलधन (Principal) प्राप्त
होता है।
साथ ही पूर्वोक्त गुणनफल से मिश्रधन (A) तथा गुण अर्थात् प्रमाण फल
(R) तथा मिश्रकाल या परकाल (t) के गुणनफल को विभक्त करने से ब्याज (I)
प्राप्त होता है।
इससे हमें मूलधन तथा ब्याज ज्ञात करने के लिये यह सूत्र प्राप्त होता है—
मिश्रधन × प्रमाण धन × प्रमाणकाल
मूलधन = ——————————————————————————————————————
प्रमाण धन × प्रमाणकाल + परकाल × प्रमाणफल
A × SP × Y
अथवा P = ————————————————
SP × Y + t × R
मिश्रधन × पर काल × प्रमाणफल
ब्याज = ———————————————————————————————————
प्रमाण धन × प्रमाणकाल + परकाल × प्रमाणफल
A × t × R
अथवा I = ————————————————
SP × Y + t × R
उदाहरणम्
मासेन पञ्चकशते मूलफलैक्यं चतुर्विहीनशतम्।
दृष्टं वर्षेण सखे किं मूलं तत्र किं च फलम्¹॥ ५७॥
न्यासः 1 12
100 96 लब्धं मूलधनम् 60। वृद्धिः 36
5
सुक्षेमा अनुवाद-5/= रु. सैकड़ा मासिक ब्याज की दर से एक वर्ष में
मूलधन तथा ब्याज (अर्थात् मिश्रधन) 96 होता है। तो इसका अलग-2 मूलधन
तथा ब्याज बताओ।
अनुशीलन-प्रस्तुत उदाहरण में पूर्वोक्त सूत्र के द्वारा मिश्रधन के परिज्ञान के
आधार पर मूलधन तथा ब्याज का पता लगाया गया है। यहाँ 5/= प्रमाणफल
(rate), सैकड़ा या 100/= प्रमाण राशि (standard Principal= SP), 1 महीना
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 52, ग.सा.सं. 6.22-24, ग.ति.पृ. 83, ग.कौ.पृ. 60 लीलावती