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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 103, कुल 208 में से

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पृष्ठ 103

त्रिशतिका 75
1 1
न्यासः 2 3 लब्धं द्रोणाः ३। प्रस्थाः ३। कुडवः 1 कुडवभागाश्च ⁵/₇
6 9
7 10
1 0
इति नवराशिकम्
सुक्षेमा अनुवाद-2 हाथ चौड़े, 6 हाथ ऊँचे, 7 हाथ लम्बे 1 हाथी के लिये
1 द्रोण आहार खर्च होता है। तो 3 हाथ चौड़े 9 हाथ ऊँचे 10 हाथ लम्बे 1 हाथी
के लिये कितना आहार लगेगा।
2×6×7 = 84 घन विस्तार वाले 1 हाथी के लिए 1 द्रोण
1 घन विस्तार वाले 1 हाथी के लिए ¹/₈₄ द्रोण
270 घन विस्तार वाले 1 हाथी के लिए (1×270)/84 = ¹³⁵/₄₂ द्रोण
¹³⁵/₄₂ = 3 ⁹/₄₂ द्रोण, ⁹/₄₂ × 16 = ¹⁴⁴/₄₂ = 3 ¹⁸/₄₂ प्रस्थ
¹⁸/₄₂ × 4 = ⁷²/₄₂ = 1 ³⁰/₄₂ कुडव, ³⁰/₄₂ = ⁵/₇ कुडवभाग
भाण्डप्रतिभाण्डके सूत्रम्
विपरीतकृते मूल्ये भाण्डप्रतिभाण्डके विधिः पूर्वः¹।
सुक्षेमा अनुवाद-भाण्ड प्रतिभाण्डक में मूल्य, फल आदि को विपरीत रीति
से स्थान-परिवर्तन करके पूर्वोक्त विधि करने से अज्ञात राशि प्राप्त होती है।
अनुशीलन-भाण्ड का अर्थ वस्तु है तथा प्रतिभाण्ड विनिमय द्वारा प्राप्त
वस्तु है। यह विधि वस्तु-विनिमय की अज्ञात राशि का ज्ञान कराती है। अतः इसे
'वस्त-विनिमय गणित' भी कहा जाता है।
उदाहरणम्
शुण्ठ्या पलद्वयं षड्भिः पिप्पल्या नवभिः पणैः।
ततः शुण्ठ्याः पलैः षड्भिः पिप्पली कियती भवेत्²॥ ५४॥
१. तुल. ब्रा.स्फु.सि. 12.13, पाटी-गणित सू. 46, ग.सा.सं. 6.18, म.सि. 15.28, ग.ति.पृ. 80
सि.शे. 13.16, लीलावती
२. तुल. पाटी-गणित उदा. 48, ग.सा.सं. 6.19-20