तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा
पृष्ठ 33, कुल 334 में से
संदर्भ में पढ़ें10 भूमिका
परन्तु तिरुवल्लुवर के यश-शरीर का प्रकाश उनके जीवन-काल में ही
प्रज्ज्वलित हो उठा था। उनके समकालीन नक्कीरर, चात्तनार, कपिलर, परणर
आदि अनेक तमिऴ महाकवियों ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। भगवान
शिव की कविता के दोष को, उनके ज्वलन्त तृतीय नेत्र को प्रत्यक्ष करने पर भी
निडर होकर, "तृतीय नेत्र को दिखाने पर भी दोष दोष ही है"¹ ऐसा शिव के
ही सम्मुख कहने का सामर्थ्य जिस कवि-शिरोमणि नक्कीरर में था, उन्होंने भी
तिरुवल्लुवर की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की है। इनके अतिरिक्त केरळ-सम्राट्
चॆङ्गुट्टुवन के अनुज तथा चिलप्पदिकारम् महाकाव्य के रचयिता श्री इळंगोवडिहळ्
तथा अन्यान्य अनेक श्रेष्ठ कवियों ने हृदय से इनकी प्रशंसा के गीत
गाये हैं। तमिऴ के प्रसिद्ध आलोचक एवं लेखक श्री चेल्वकेशवराय मुदलियार
ने तिरुवल्लुवर को तमिऴ की 'गति-द्वै'² में से एक माना है। ' अनेक भारतीय
एवं पाश्चात्य भाषाओं व साहित्यों के अध्ययन के पश्चात् आधुनिक तमिऴ
साहित्य के कवि-सम्राट् स्वर्गीय श्री सुब्रह्मण्य भारती ने कहा है कि तिरुवल्लुवर
जैसे श्रेष्ठ कवि को और कहीं नहीं देखा।³ तिरुवल्लुवर का स्थाई यश इसीसे
- “ நெற்றிக கண்ணைக காட்டினும் குற்றம் குற்றமே ”—நக்கீரர்.
- “ தமிழககுக கதியாவா இருவா எனச சில புலவர் புகழ்
வதுண்டு. கதி எனபதில் கஃகாணைக கம்பநாட்டாழ்வாருக்கும்,
திஃகாணேத திருவள்ளுவருககும ஞாபக சூத்திரமாகக கொள்ளல்
வேண்டும்.”-P. 7. 'Tiruvalluvar' by Sri Chelvakesavaroya
Mudaliar M. A. - “ யாமறிந்த புலவரிலே கம்பனைப்போல்
வள்ளுவர்போல் இளங்கோவைப் போல்,
பூமிதனில யாங்கணுமே பிறந்ததிலை,
உண்மை வெறும் புகழ்ச்சி இல்லை. ”
जो ज्ञात हैं कविगण मुझे, उनमे न कम्बर के समान,
तिरुवल्लुवर के सम न, अथवा कवि इळङ्गो के समान ।
जन्मे न इस भू पर कहीं भी आज तक इनके समान,
नहि डींग कोरी, सत्य है यह सन्तवाणी के समान ॥