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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 118 में से

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पृष्ठ 55

“धर्मशाला के रोजनामचे में ये सूचनाएँ गलत भी तो दर्ज हो सकती हैं, जैसे मेरे और
तुम्हारे बारे में यह सूचना दर्ज है कि हम दोनों जवाहरातों की खरीद के लिए सौरभ नगर
आए हैं।” महाराज ने पूछा।
“जी हाँ, महाराज! पर इसकी सम्भावना बहुत क्षीण है।” तेनाली राम ने उत्तर दिया।
“वह कैसे?” महाराज ने पूछा।
“वह ऐसे महाराज कि आसपास, मेरा मतलब है कि सौरभ नगर के आसपास दूसरा
राज्य केवल विजयनगर ही है। इस तरह छद्मवेश में किसी दूरस्थ राज्य का राजा यहाँ
आए, उसका कारण भी तो होना चाहिए। सम्प्रति इस तरह का कोई कारण नहीं दिखता।
सौरभ नगर की शासन प्रणाली ने मुक्त व्यापार की नीति अपनाई है। इस राज्य का अपना
कोई अर्थ-स्रोत ही नहीं है। पर्यटन के लिए बाहर से जो लोग यहाँ आते हैं, उनसे ही यहाँ
का राजस्व चलता है।...दूसरे राज्यों से लोग यहाँ आते रहें इसलिए ही इस राज्य में ‘मुक्त
व्यापार प्रणाली’ अपनाई गई है। यही कारण है कि यहाँ विभिन्न राज्यों के सौदागर बिना
किसी रोक-टोक के आते हैं।”
महाराज ने तेनाली राम की ओर प्रशंसा-भरी -ष्टि से देखते हुए सोचा कि तेनाली राम
इसीलिए तो महत्त्वपूर्ण है कि वह हर बात को सूक्ष्मता से समझता है। महाराज तेनाली
राम के साथ धर्मशाला के व्यवस्थापक के कक्ष में गए। तेनाली राम ने व्यवस्थापक की ओर
देखते हुए पूछा, ”वह गधेवाला सौदागर?“
“कौन...वह जो कन्धार से आता है?” व्यवस्थापक ने पूछा।
असल में तेनाली राम के पूछने का ढंग ही ऐसा था कि व्यवस्थापक को महसूस हुआ कि
उसका उस सौदागर से पूर्व का सम्बन्ध है। व्यवस्थापक ने तेनाली राम से कहा, “आप
सामने के गलियारे से सीधे चले जाएँ। अन्तिम दाईं तरफ के कमरे में वह मिल जाएगा।“
“इस बार वह क्या लाया है?”
तेनाली राम की ओर व्यवस्थापक ने आश्चर्य से देखा, फिर कहा, “वही पाँच गधे! अरे
भाई, बात बेचनेवाला और क्या लाएगा?”
तेनाली राम ने जब यह सुना तब महाराज से कहा, ”चलें, उससे मिल ही लें।”
असल मे व्यवस्थापक की बातें सुनकर तेनाली राम की उत्सुकता उस गधेवाले सौदागर के
प्रति बढ़ गई थी।
चलते-चलते तेनाली राम ने व्यवस्थापक से पूछा, “आप उसके गधों को भी कमरे में रहने