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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 118 में से

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पृष्ठ 51

इनकी यह शर्त स्वीकार है।”
फिर तेनाली राम उस विद्वान के साथ अपने घर आ गया। उस दिन की सभा विसर्जित हो
गई।
तेनाली राम के घर पर उत्सव जैसा माहौल था। उसके सगे-सम्बन्धी, इष्ट-मित्र सभी
बुलाए गए थे। शाम ढल चुकी थी। तेनाली राम के द्वार पर कई मशाल जलाकर प्रकाश
किया गया था। तेनाली राम ने अपने पड़ोसियों को भी सूचित किया था कि उसके घर एक
ऐसा विद्वान आया हुआ है जिससे वे चाहे जिस बोली या भाषा में बात करें, वह उन्हें उसी
बोली में उत्तर देगा। देर रात तक तेनाली राम के दरवाजे पर लोगों का मजमा लगा रहा।
विद्वान जब थककर चूर हो चुका तब तेनाली राम ने लोगों को विदा किया। उसने विद्वान
को खूब मीठे पकवान खिलाए जिसके कारण विद्वान को नींद आने लगी। तेनाली राम ने
उसके सोने की व्यवस्था अलग कमरे में कराई। जब विद्वान सो गया तब तेनाली राम ने एक
सेवक को एक बर्तन में गरम पानी दिया और कहा, “तुम जाओ और जाकर उस सोए हुए
अतिथि के एक पाँव पर यह गरम पानी उड़ेल आओ। इसके बाद जो कुछ भी होगा, उससे मैं
निपट लूँगा।”
सेवक डरता हुआ विद्वान वाले कमरे में गया। थोड़ी ही देर में विद्वान की चीख और कन्नड़
में उसके बोलने की आवाज सुनकर तेनाली राम उसके कमरे में पहुँचकर विद्वान से पूछा,
”क्या हुआ?”
विद्वान उस समय घबराया हुआ था। विद्वान ने तेनाली राम से कहा, “तुम्हारे सेवक ने
मेरे उ$पर गरम पानी डाल दिया।”
यह सुनकर तेनाली राम ने चीखकर अपने सेवक को आवाज लगाई, “रामलिंगम्, इधर
आओ! सुनो, हमारे माननीय अतिथि क्या कह रहे हैं!”
रामलिंगम् ने कहा, “स्वामी, मैं आपकी दवा के लिए गरम पानी लेकर आ रहा था। हाथ
में गरम पानी लेकर जब मैं दवा लेने के लिए इस कमरे में आया तो मेरा पाँव पलंग के पाये
से टकरा गया और कटोरे से थोड़ा पानी छलककर इनके पाँव पर गिर गया जिसके कारण
ये जग गए और मैं इनके क्रोध से बचने के लिए डरकर बाहर भाग गया।”
तेनाली राम ने हाथ जोड़कर अतिथि से क्षमा-याचना की और उसके पाँव को ठंडे पानी से
धोकर उस पर आलू के गूदे का लेप लगाया जिससे अतिथि की जलन शान्त हो गई और वह
शान्ति से सो गया।
दूसरे दिन तेनाली राम अपने विद्वान अतिथि के साथ महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में