तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ६
अथ षष्ठोऽध्यायः
Influx of Karma
कायवाङ्मनःकर्म योगः ॥१॥
[ कायवाङ्मनः कर्म ] शरीर, वचन और मन के अवलम्बन
से आत्मा के प्रदेशों का संकल्प होना सो [ योगः ] योग है।
The action of the body, the organ of speech and the
mind is called yoga (activity).
स आस्रवः ॥२॥
[ सः ] वह योग [ आस्रवः ] आस्रव है।
It (this threefold activity) is influx (āsrava).
शुभः पुण्यस्याशुभः पापस्य ॥३॥
[ शुभः ] शुभ योग [ पुण्यस्य ] पुण्य कर्म के आस्रव में
कारण है और [ अशुभः ] अशुभ योग [ पापस्य ] पाप कर्म
के आस्रव में कारण है।
Virtuous activity is the cause of merit (puṇya) and
wicked activity is the cause of demerit (pāpa).
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