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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

अध्याय - ५
धर्माधर्मयोः कृत्स्ने ॥१३॥
[ धर्माधर्मयोः ] धर्म और अधर्म द्रव्य का अवगाह [ कृत्स्ने ]
तिल में तेल की तरह समस्त लोकाकाश में है।
The media of motion and rest pervade the entire
universe-space.
एकप्रदेशादिषु भाज्यः पुद्गलानाम् ॥१४॥
[ पुद्गलानाम् ] पुद्गल द्रव्य का अवगाह [ एक प्रदेशादिषु ]
लोकाकाश के एक प्रदेश से लेकर संख्यात और असंख्यात
प्रदेश पर्यन्त [ भाज्यः ] विभाग करने योग्य है - जानने योग्य
है।
The forms of matter occupy (inhabit) from one unit
of space onwards.
असंख्येयभागादिषु जीवानाम् ॥१५॥
[ जीवानाम् ] जीवों का अवगाह [ असंख्येयभागादिषु ]
लोकाकाश के असंख्यात भाग से लेकर संपूर्ण लोक क्षेत्र में
है।
The souls inhabit from one of innumerable parts of
the universe-space.
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