तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ४
सानत्कुमारमाहेन्द्रयोः सप्त ॥३०॥
सानत्कुमार और माहेन्द्र स्वर्ग के देवों की आयु सात सागर से
कुछ अधिक है।
In Sānatkumāra and Māhendra seven.
त्रिसप्तनवैकादशत्रयोदशपञ्चदशभिरधिकानि तु ॥३१॥
पूर्व सूत्र में कहे हुए युगलों की आयु (सात सागर) से
क्रमपूर्वक, तीन, सात, नव, ग्यारह, तेरह और पन्द्रह सागर
अधिक आयु (उसके बाद के स्वर्गों में) है।
But more by three, seven, nine, eleven, thirteen
and fifteen.
आरणाच्युतादूर्ध्वमेकैकैन नवसु ग्रैवेयकेषु विजयादिषु
सर्वार्थसिद्धौ च ॥३२॥
आरण और अच्युत स्वर्ग से ऊपर के नव ग्रैवेयकों में, नव
अनुदिशों में, विजय इत्यादि विमानों में और सर्वार्थसिद्धि
विमानों में देवों की आयु एक एक सागर अधिक है।
Above Āraṇa and Acyuta, in Navagraiveyakas,
Vijaya, etc. and Sarvārthasiddhi, it is more and
more by one sāgara.
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