तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 70, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ४
Those born in the kalpas¹ and beyond the kalpas.
उपर्युपरि ॥१८॥
सोलह स्वर्ग के आठ युगल, नव ग्रैवेयक, नव अनुदिश और
पाँच अनुत्तर, ये सब विमान क्रम से ऊपर-ऊपर हैं।
One above the other.
सौधर्मेशानसानत्कुमारमाहेन्द्रब्रह्मब्रह्मोत्तर-
लान्तवकापिष्ठशुक्रमहाशुक्रशतारसहस्रारेष्वानत-
प्राणतयोरारणाच्युतयोर्नवसु ग्रैवेयकेषु
विजयवैजयन्तजयन्तापराजितेषु सर्वार्थसिद्धौ च ॥१९॥
सौधर्म-ईशान, सानत्कुमार-माहेन्द्र, ब्रह्म-ब्रह्मोत्तर,
लान्तव-कापिष्ठ, शुक्र-महाशुक्र, शतार-सहस्रार इन छह युगलों
के बारह स्वर्गों में, आनत-प्राणत इन दो स्वर्गों में,
आरण-अच्युत इन दो स्वर्गों में, नव ग्रैवेयक विमानों में, नव
अनुदिश विमानों में और विजय, वैजयन्त, जयन्त, अपराजित
तथा सर्वार्थसिद्धि इन पाँच अनुत्तर विमानों में वैमानिक देव
रहते हैं।
¹ The kalpas are the habitations of devas from Saudharma prior to
Graiveyakas. Refer to sutra 19 and 23.
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