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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 177 में से

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पृष्ठ 54

अध्याय - ३
हेमार्जुनतपनीयवैडूर्यरजतहेममयाः ॥१२॥
ऊपर कहे गये पर्वत क्रम से 1- स्वर्ण, 2- चाँदी, 3- तपाया
सोना, 4- वैडूर्य (नील) मणि, 5- चाँदी और 6- स्वर्ण जैसे
रंग के हैं।
They are of golden, white, like purified gold, blue,
silvery, and golden in colour.
मणिविचित्रपार्श्वा उपरि मूले च तुल्यविस्ताराः ॥१३॥
इन पर्वतों का तट चित्र-विचित्र मणियों का है और
ऊपर-नीचे तथा मध्य में एक समान विस्तार वाला है।
The sides (of these mountains) are studded with
various jewels, and the mountains are of equal
width at the foot, in the middle and at the top.
पद्ममहापद्मतिगिञ्छकेशरिमहापुण्डरीकपुण्डरीका
ह्रदास्तेषामुपरि ॥१४॥
इन पर्वतों के ऊपर क्रम से 1- पद्म, 2- महापद्म,
3- तिगिञ्छ, 4- केशरि, 5- महापुण्डरीक और 6- पुण्डरीक
नाम के ह्रद-सरोवर हैं।
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