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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 36

अध्याय - २
स्पर्शनरसनघ्राणचक्षुःश्रोत्राणि ॥१९॥
[ स्पर्शन ] स्पर्शन, [ रसन ] रसना, [ घ्राण ] नाक, [ चक्षुः ]
चक्षु और [ श्रोत्र ] कान - यह पाँच इन्द्रियाँ हैं।
Touch, taste, smell, sight, and hearing (are the
senses).
स्पर्शरसगन्धवर्णशब्दास्तदर्थाः ॥२०॥
[ स्पर्शरसगन्धवर्णशब्दाः ] स्पर्श, रस, गन्ध, वर्ण (रंग),
शब्द - यह पाँच क्रमशः [ तत् अर्थाः ] उपरोक्त पाँच
इन्द्रियों के विषय हैं अर्थात् उपरोक्त पाँच इन्द्रियाँ उन-उन
विषयों को जानती हैं।
Touch, taste, smell, colour and sound are the
objects of the senses.
श्रुतमनिन्द्रियस्य ॥२१॥
[ अनिन्द्रियस्य ] मन का विषय [ श्रुतम् ] श्रुतज्ञानगोचर पदार्थ
हैं अथवा मन का प्रयोजन श्रुतज्ञान है।
Scriptural knowledge is the province of the mind.
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