तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - २
पृथिव्यप्तेजोवायुवनस्पतयः स्थावराः ॥१३॥
[ पृथिवी अप् तेजः वायुः वनस्पतयः ] पृथ्वीकायिक,
जलकायिक, अग्निकायिक, वायुकायिक और वनस्पतिकायिक
- यह पाँच प्रकार के [ स्थावराः ] स्थावर जीव हैं। (इन
जीवों के मात्र एक स्पर्शन इन्द्रिय होती है।)
Earth, water, fire, air and plants are immobile
beings.
द्वीन्द्रियादयस्त्रसाः ॥१४॥
[ द्वीन्द्रिय आदयः ] दो इन्द्रिय से लेकर अर्थात् दो इन्द्रिय,
तीन इन्द्रिय, चार इन्द्रिय और पाँच इन्द्रिय जीव [ त्रसाः ] त्रस
कहलाते हैं।
The mobile beings are from the two-sensed beings
onwards.
पश्चेन्द्रियाणि ॥१५॥
[ इन्द्रियाणि ] इन्द्रियाँ [ पञ्च ] पाँच हैं।
The senses are five.
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