तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 31, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - २
[ गति ] तिर्यंच, नरक, मनुष्य और देव – यह चार गतियाँ,
[ कषाय ] क्रोध, मान, माया, लोभ - यह चार कषायें,
[ लिंग ] स्त्रीवेद, पुरुषवेद और नपुसंकवेद – यह तीन लिंग,
[ मिथ्यादर्शन ] मिथ्यादर्शन [ अज्ञान ] अज्ञान [ असंयत ]
असंयम [ असिद्ध ] असिद्धत्व तथा [ लेश्याः ] कृष्ण, नील,
कापोत, पीत, पद्म और शुक्ल – यह छह लेश्यायें, इस प्रकार
[ चतुः चतुः त्रि एक एक एक एक षड् भेदाः ]
4+4+3+1+1+1+1+6=21, इस प्रकार सब मिलाकर
औदयिकभाव के 21 भेद हैं।
(These are) the conditions of existence, the
passions, sex, wrong belief, wrong knowledge, non-
restraint, non-attainment of perfection (imperfect
disposition), and colouration, which are of four,
four, three, one, one, one, one, and six kinds.
जीवभव्याभव्यत्वानि च ॥७॥
[ जीवभव्याभव्यत्वानि च ] जीवत्व, भव्यत्व और अभव्यत्व
– इस प्रकार पारिणामिक भाव के तीन भेद हैं।
(The three are) the principle of life (consciousness),
capacity for salvation, and incapacity for salvation.
18