तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - २
(These are of) two, nine, eighteen, twenty-one, and
three kinds respectively.
सम्यक्त्वचारित्रे ॥३॥
[ सम्यक्त्व ] औपशामिक सम्यक्त्व और [ चारित्रे ]
औपशामिक चारित्र - इस प्रकार औपशामिकभाव के दो भेद
हैं।
(The two kinds are) right belief and conduct.
ज्ञानदर्शनदानलाभभोगोपभोगवीर्याणि च ॥४॥
[ ज्ञान दर्शन दान लाभ भोग उपभोग वीर्याणि ]
केवलज्ञान, केवलदर्शन, क्षायिकदान, क्षायिकलाभ, क्षायिकभोग,
क्षायिकउपभोग, क्षायिकवीर्य तथा [ च ] च कहने पर,
क्षायिकसम्यक्त्व और क्षायिकचारित्र - इस प्रकार क्षायिकभाव
के नौ भेद हैं।
(The nine kinds are) knowledge, perception, gift,
gain, enjoyment, re-enjoyment, energy, etc.
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