तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 28, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - २
अथ द्वितीयोऽध्यायः
The Category of the Living
औपशमिकक्षायिकौ भावौ मिश्रश्च जीवस्य
स्वतत्त्वमौदयिकपारिणामिकौ च ॥१॥
[ जीवस्य ] जीव के [ औपशमिकक्षायिकौ ] औपशमिक
और क्षायिक [ भावौ ] भाव [ च मिश्रः ] और मिश्र तथा
[ औदयिक-पारिणामिकौ च ] औदयिक और पारिणामिक
यह पाँच भाव [ स्वतत्त्वम् ] निजभाव हैं अर्थात् यह जीव के
अतिरिक्त दूसरे में नहीं होते।
The distinctive characteristics of the soul are the
dispositions (thought-activities) arising from
subsidence, destruction, destruction-cum-
subsidence of karmas, the rise of karmas, and the
inherent nature or capacity of the soul.
द्विनवाष्टादशैकविंशतित्रिभेदाः यथाक्रमम् ॥२॥
उपरोक्त पाँच भाव [ यथाक्रमम् ] क्रमशः [ द्वि नव
अष्टादश एकविंशति त्रिभेदाः ] दो, नव, अट्ठारह, इक्कीस
और तीन भेद वाले हैं।
15