तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - १
तदिन्द्रियानिन्द्रियनिमित्तम् ॥१४॥
[ इन्द्रियानिन्द्रिय ] इन्द्रियाँ और मन [ तत् ] उस मतिज्ञान के
[ निमित्तम् ] निमित्त हैं।
That is caused by the senses and the mind.
अवग्रहेहावायधारणाः ॥१५॥
[ अवग्रह ईहा अवाय धारणाः ] अवग्रह, ईहा, अवाय, और
धारणा यह चार भेद हैं।
(The four divisions of sensory knowledge are)
apprehension (sensation), speculation, perceptual
judgment, and retention.
बहुबहुविधक्षिप्रानिःसृतानुक्तध्रुवाणां सेतराणाम् ॥१६॥
[ बहु ] बहुत [ बहुविध ] बहुत प्रकार [ क्षिप्र ] जल्दी
[ अनिःसृत ] अनिःसृत [ अनुक्त ] अनुक्त [ ध्रुवाणां ] ध्रुव
[ सेतराणां ] उनसे उल्टे भेदों से युक्त अर्थात् एक, एकविध,
अक्षिप्र, निःसृत, उक्त, और अध्रुव, इस प्रकार बारह प्रकार
के पदार्थों का अवग्रह ईहादिरूप ज्ञान होता है।
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