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सर्वकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

अध्याय - १
अथ प्रथमोऽध्यायः
Faith and Knowledge
सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः ॥१॥
[ सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि ] सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और
सम्यक्चारित्र, तीनों मिलकर [ मोक्षमार्गः ] मोक्ष का मार्ग है,
अर्थात् मोक्ष की प्राप्ति का उपाय है।
Right faith, right knowledge, and right conduct
(together) constitute the path to liberation.
तत्त्वार्थश्रद्धानं सम्यग्दर्शनम् ॥२॥
[ तत्त्वार्थश्रद्धानं ] तत्त्व (वस्तु) के स्वरूप सहित
अर्थ-जीवादि पदार्थों की श्रद्धा करना [ सम्यग्दर्शनम् ]
सम्यग्दर्शन है।
Belief in substances ascertained as they are is right
faith.
तन्निसर्गादधिगमाद्वा ॥३॥
[ तत्् ] वह सम्यग्दर्शन [ निसर्गात्् ] स्वभाव से [ वा ]
अथवा [ अधिगमात्् ] दूसरे के उपदेशादि से उत्पन्न होता है।
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