सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 127, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 127

अध्याय - ८
Bondage is of four kinds according to the nature or
species of karma, duration of karma, fruition of
karma, and the quantity of space-points of karma.
आद्यो ज्ञानदर्शनावरणवेदनीयमोहनीयायुर्नाम-
गोत्रान्तरायाः ॥४॥
[ आद्यो ] पहला अर्थात् प्रकृतिबन्ध [ ज्ञानदर्शनावरण-
वेदनीयमोहनीयायुर्नामगोत्रान्तरायाः ] ज्ञानावरण, दर्शनावरण,
वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र और अन्तराय - इन आठ
प्रकार का है।
The type-bondage is of eight kinds, knowledge-
obscuring, perception-obscuring, feeling-producing,
deluding, life-determining, name-determining
(physique-making), status-determining, and
obstructive karmas.
पञ्चनवद्व्यष्टाविंशतिचतुर्द्विचत्वारिंशद्द्विपञ्चभेदा
यथाक्रमम् ॥५॥
[ यथाक्रमम् ] उपरोक्त ज्ञानावरणादि आठ कर्मों के अनुक्रम
से [ पञ्चनवद्व्यष्टाविंशतिचतुर्द्विचत्वारिंशद्द्विपञ्चभेदाः ]
पाँच, नव, दो, अट्ठाईस, चार, ब्यालीस, दो और पाँच
भेद हैं।
114

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 127, कुल 177 में से · SarvaKosh