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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

अध्याय - ८
अथ अष्टमोऽध्यायः
Bondage of Karma
मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगा बन्धहेतवः ॥१॥
[ मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगाः ] मिथ्यादर्शन,
अविरति, प्रमाद, कषाय और योग - ये पाँच [ बंधहेतवः ]
बन्ध के कारण हैं।
Wrong belief, non-abstinence, negligence, passions,
and activities are the causes of bondage.
सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्पुद्गलानादत्ते स
बन्धः ॥२॥
[ जीवः सकषायत्वात् ] जीव कषायसहित होने से [ कर्मणः
योग्यान्पुद्गलान् ] कर्म के योग्य पुद्गल परमाणुओं को
[ आदत्ते ] ग्रहण करता है [ स बन्धः ] वह बन्ध है।
The individual self attracts particles of matter
which are fit to turn into karma, as the self is
actuated by passions. This is bondage.
प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशास्तद्विधयः ॥३॥
[ तत् ] उस बन्ध के [ प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशाः ]
प्रकृतिबन्ध, स्थितिबन्ध, अनुभागबन्ध और प्रदेशबन्ध
[ विधयः ] ये चार भेद हैं।
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