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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 177 में से

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पृष्ठ 108

अध्याय - ७
[ क्रोधलोभभीरुत्वहास्यप्रत्याख्यानानि ] क्रोधप्रत्याख्यान,
लोभप्रत्याख्यान, भीरुत्वप्रत्याख्यान, हास्यप्रत्याख्यान अर्थात्
क्रोध का त्याग करना, लोभ का त्याग करना, भय का त्याग
करना, हास्य का त्याग करना [ अनुवीचिभाषणं च ] और
शास्त्र की आज्ञानुसार निर्दोष वचन बोलना [ पञ्च ] ये पाँच
सत्यव्रत की भावनायें हैं।
Giving up anger, greed, cowardice or fearfulness,
and jest, and speaking harmless words are five.
शून्यागारविमोचितावासपरोपरोधाकरणभैक्ष्यशुद्धि-
सधर्माविसंवादाः पञ्च ॥६॥
[ शून्यागारविमोचितावासपरोपरोधाकरणभैक्ष्यशुद्धि-
सधर्माविसंवादाः ] शून्यागारवास- पर्वतों की गुफा, वृक्ष की
पोल इत्यादि निर्जन स्थानों में रहना, विमोचितावास- दूसरों के
द्वारा छोड़े गये स्थान में निवास करना, किसी स्थान पर रहते
हुये दूसरों को न हटाना तथा यदि कोई अपने स्थान में आवे
तो उसे न रोकना, शास्त्रानुसार भिक्षा की शुद्धि रखना और
साधर्मियों के साथ यह मेरा है-यह तेरा है ऐसा क्लेश न
करना [ पञ्च ] ये पाँच अचौर्यव्रत की भावनायें हैं।
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