तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ६
[ सम्यक्त्वं च ] सम्यग्दर्शन भी देवायु के आस्रव का कारण
है अर्थात् सम्यग्दर्शन के साथ रहा हुआ जो राग है वह भी
देवायु के आस्रव का कारण है।
Right belief also (is the cause of influx of life-karma
leading to celestial birth).
योगवक्रता विसंवादनं चाशुभस्य नाम्नः ॥२२॥
[ योगवक्रता ] योग में कुटिलता [ विसंवादनं च ] और
विसंवादन अर्थात् अन्यथा प्रवर्तन [ अशुभस्य नाम्नः ] अशुभ
नामकर्म के आस्रव का कारण हैं।
Crooked activities and deception cause the influx of
inauspicious physique-making karmas.
तद्विपरीतं शुभस्य ॥२३॥
[ तद्विपरीतं ] उससे अर्थात् अशुभ नामकर्म के आस्रव के जो
कारण कहे उनसे विपरीत भाव [ शुभस्य ] शुभ नामकर्म के
आस्रव का कारण हैं।
The opposites of these (namely straightforward
activity, and honesty or candour) cause the influx of
auspicious physique-making karmas.
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