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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

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पृष्ठ 8

लेकिन इससे ही हमारे दानका, कर्मका अन्त न
होगा। क्योंकि :—
जोतो देवो प्रान वोहे जावे प्रान
फुरावे ना आर प्रान ;
एतो कोथा आछे एतो गान आछे
एतो प्रान आछे मोर ;
एतो सूख आछे एतो साध आछे
प्रान होए आछे भोर
अनन्त आशा, असीम उत्साह, अपरिमेय तेज और
अदम्य साहस लेकर हम आये हैं, तभी तो हमारा जीवन-
श्रोत कभी रुंध नहीं सकता। अविश्वास और निराशा-
के पर्वत सामने अड़ जायं, सम्पूर्ण मानव जातिकी शक्ति
प्रतिकूल होकर आक्रमण करे, तब भी हमारी आनन्दमयी
गति चिरकाल तक अक्षुण्ण रहेगी।
हमारा एक विशेष धर्म है, हम उसी धर्मका अनु-
सरण करते हैं। जो नवीन है, जो सरस है, जिसका स्वाद
दुनियाने आजतक नहीं चखा, हम उसीके उपासक हैं।
हम पुरातनमें नवीन का, जड़में चेतनका, प्रौढ़में यौवनका,
बन्धनमें असीमका उद्भाव करते हैं। हम इतिहाससे प्राप्त
पुरानी अभिज्ञताको हर समय, हर हालतमें माननेको
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