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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 137, कुल 174 में से

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पृष्ठ 137

तरुणके स्वप्न
सत्यका आविष्कार करनेकी क्षमता आपमें ही है। साध-
रण उपकरणके द्वारा भी आप इतनी सुन्दर चीज लिख
सके हैं !
जो उनके अन्तरङ्ग थे, उनके हृदयमें एक गोपन कथा
रह गयी। उन गोपन कथाओंमें कुछका उल्लेखकर
आपने सिर्फ सत्यकी ही प्रतिष्ठा नहीं की है, बल्कि आपने
हमारे मनका भार भी हलका कर दिया। सचमुच, “परा-
धीन देशकेलिये सबसे बड़ा अभिशाप यही है कि विदे-
शियोंकी अपेक्षा अपने देशवासियोंके साथ ही अधिक
लड़ाई करनी पड़ती है।” इस उक्तिमें जो निष्ठुर सत्य
है, उसे राष्ट्र सेवियोंने अच्छी तरह अनुभव किया है
और अब भी कर रहे हैं।
आपके लेखमें मुझे यह बात सबसे अच्छी लगी कि
“अत्यन्त प्रिय, बिलकुल अपने आत्मीयकेलिये हृदयमें
जैसी आग लग जाती है, यह वैसी ही आग है। आज
हम लोग जो उनके आस पास थे, उनकी ऐसी हालत
ही रही है कि हमारे पास अपना मार्मिक दुख प्रकट करने
लायक भाषा भी नहीं है और दूसरेके सामने यह दुखड़ा
रोना अच्छा भी नहीं लगता”। सचमुच हृदयकी गूढ़ बात
क्या दूसरेसे आसानीसे कही जा सकती है? हां, वे
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