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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 174 में से

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पृष्ठ 125

तरुणके स्वप्न
आवेदन पत्रको क्यों रोक लिया, यह पूछने पर भी उसका
कुछ उत्तर नहीं मिला। इसके बाद अपने निर्वाचनके विषयमें
व्यक्ति विशेषको मैंने जो पत्र दिये थे, उनमेंसे भी अधिक
अपने लक्ष स्थान तक नहीं पहुंचे। जब मैं जेलमें था तब
एक उच्च कर्मचारीसे सुना था कि अधिकारियोंकी इच्छा
है कि मैं जेलमें रहकर निर्वाचनका काम न चला सकूं।
किन्तु मुझे विश्वास है कि मेरा लिखित निवेदन
आपके पास न पहुंचनेपर भी मेरे आकुल हृदयका मूक
निवेदन आपके पास पहुंच गया होगा। इसीलिये मेरा
निवेदन न सुननेपर भी और अति प्रबल योग्य प्रतिद्वन्दी
होनेपर भी मेरे जैसे अयोग्य आदमीको वोट देकर आपने
निर्वाचित किया है। माण्डला जेलमें रातको दस बजे जब मैंने
कई राजबन्दियोंके साथ निर्वाचनकी सफलताका समा-
चार सुना, उस समय प्रकट रूपसे आपके प्रति कृतज्ञता
नहीं जना सका। किन्तु मेरा विश्वास है कि नदी, नद,
जंगल पारकर मेरे हृदयकी वाणी आपके पासतक पहुंच
गयी होगी।
आपके प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट करनेका कारण यह
है कि जिस अवस्थामें पड़कर मित्रको उसके मित्र भी
पहचान नहीं पाते, ऐसे समयमें, जब कि मैं अधिकारियों
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