तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)
Tarkasangraha with Nyayabodhini of Annambhatta by Kedarnath Tripathi
अन्नम्भट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ तर्कसंग्रहः [ अनुमानपरिच्छेदः
घटवदिति । ( अत्र ) कृतकत्वं हि नित्यत्वाभावेनाऽनित्यत्वेन
व्याप्तम् ।
साध्याभावसाधकं हेत्वन्तरं यस्य, स सत्प्रतिपक्षः । यथा-
शब्दो नित्यः श्रावणत्वाच्छब्दत्ववत्, शब्दोऽनित्यः कार्यत्वाद्
घटवत् ।
हेत्वाभास है । जैसे—"शब्दो नित्यः कृतकत्वात्" इस अनुमान में कृतकत्व-हेतु
विरुद्ध है । क्योंकि कृतकत्व-हेतु नित्यत्वाभावरूप अनित्य से व्याप्त है ।
जिस हेतु के साध्य का अभाव सिद्ध करने वाला हेत्वन्तर ( दूसरा हेतु ) विद्य-
मान हो, वह सत्प्रतिपक्षनामक हेत्वाभास है । जैसे—"शब्दो नित्यः श्रावणत्वात्
शब्दत्ववत्" इस अनुमान में श्रावणत्व-हेतु नित्यत्व का साधक है । किन्तु इसके विप-
रीत "शब्दोऽनित्यः कार्यत्वात् घटवत्" इस अनुमान में प्रयुक्त कार्यत्वरूप हेत्वन्तर
नित्यत्व-साध्य का अभावरूप अनित्य सिद्ध करने वाला भी विद्यमान है । इसलिये यहाँ
के दोनों ही अनुमानों के दोनों ही हेतु परस्पर के प्रति सत्प्रतिपक्षत हो जाते हैं और
दोनों ही अनुमिति रुक जाती है ।
न्यायबोधिनी
विरुद्धं लक्षयति—साध्याभावव्याप्त इति । साध्याभावव्याप्तिः =
साध्याभावनिरूपितव्यतिरेकव्याप्तिः=साध्यव्यापकीभूताभावप्रतियोगित्वम् ।
तथा च पक्षविशेष्यकसाध्याभावव्याप्यहेतुप्रकारकज्ञानात् पक्षविशेष्यकसाध्य-
प्रकारकानुमितिप्रतिबन्धः फलम् । एवं सत्प्रतिपक्षेऽपि । विरुद्धसत्प्रतिपक्ष-
योर्विशेषस्तु विरुद्धहेतोरेकत्वेन सत्प्रतिपक्षहेतोर्द्वित्वेन च ज्ञातव्यः ।
हिन्दी-कला
साध्याभाव का व्याप्त हेतु विरुद्ध है । साध्याभाव की व्याप्ति का अर्थ है—
साध्याभावनिरूपित व्यतिरेकव्याप्ति । अर्थात् साध्य का व्यापकीभूत जो अभाव,
उसका प्रतियोगी होना साध्याभाव की व्याप्ति है । जैसे—"शब्दो नित्यः कृतकत्वात्"
यहाँ कृतकत्व-हेतु नित्यत्व-साध्य का व्यापकीभूत कृतकत्वाभाव का प्रतियोगी है,
इसलिए कृतकत्व-हेतु नित्यत्वसाध्य के प्रति विरुद्ध है ।
पक्ष में साध्याभावव्याप्यहेतुप्रकारक ज्ञान होने पर पक्षविशेष्यक साध्य-
प्रकारक अनुमति का प्रतिबन्ध हो जाता है । यही इस हेत्वाभासज्ञान का फल है ।
सत्प्रतिपक्षस्थल में भी अनुमिति का प्रतिबन्ध ही फल है । फिर भी विरुद्ध और
सत्प्रतिपक्ष में यह अन्तर है कि विरुद्ध में एक ही हेतु का प्रयोग होता है, और सत्प्रति-
पक्ष में दो हेतुओं का प्रयोग होता है ।